ग़ज़ा में भुखमरी से मरने वालों की तादाद 466 पहुँची, 157 बच्चे भी शामिल

गज़ा पट्टी में भुखमरी और कुपोषण का संकट लगातार गंभीर होता जा रहा है। ग़ज़ा के स्वास्थ्य मंत्रालय के हवाले से प्रकाशित रिपोर्ट के मुताबिक, 2024 से अब तक भुखमरी और कुपोषण से संबंधित मौतों की तादाद 466 तक पहुँच गई है, जिनमें 157 बच्चे शामिल हैं। फ़िलिस्तीनी सूचना केंद्र (PIC) ने शुक्रवार को विश्व खाद्य दिवस के मौक़े पर जारी इस रिपोर्ट में बताया कि ग़ज़ा की लगभग 67 फ़ीसदी आबादी यानी 14 लाख से ज़्यादा फ़िलिस्तीनी गंभीर खाद्य असुरक्षा या उससे भी बदतर हालात का सामना कर रहे हैं।

पाँच साल से कम उम्र के बच्चों पर सबसे ज़्यादा असर

रिपोर्ट के मुताबिक, 2024 से अगस्त 2026 के बीच पाँच साल से कम उम्र के बच्चों में कुपोषण के 1,58,001 मामले दर्ज किए गए। इनमें 28,716 मामले गंभीर कुपोषण के थे। अनुमान है कि अप्रैल 2027 तक लगभग 74,200 बच्चों को गंभीर कुपोषण के इलाज की ज़रूरत पड़ सकती है। रिपोर्ट में बच्चों और गर्भवती महिलाओं की बिगड़ती सेहत पर भी चिंता जताई गई है। स्वास्थ्य मंत्रालय के अनुसार, पाँच साल से कम उम्र के बच्चों की मृत्यु दर 2022 में प्रति 1,000 जीवित जन्मों पर 13.6 थी, जो 2025 में बढ़कर 33.4 हो गई।

बुज़ुर्गों और गर्भवती महिलाओं की हालत भी चिंताजनक

स्वास्थ्य मंत्रालय के आँकड़ों के मुताबिक, भुखमरी से संबंधित मौतों में 189 बुज़ुर्ग शामिल हैं। वहीं, गर्भवती महिलाओं में ख़ून की कमी यानी एनीमिया की दर 2026 में बढ़कर 61 फ़ीसदी हो गई, जबकि युद्ध से पहले यह 41 फ़ीसदी थी। रिपोर्ट में यह भी दावा किया गया है कि 2026 की पहली छमाही में गर्भावस्था के लगभग 4,000 मामलों में गर्भपात या गर्भावस्था समाप्त होने की घटनाएँ दर्ज की गईं। लगभग हर तीन में से एक गर्भावस्था को उच्च जोखिम वाली बताया गया।

अंतरराष्ट्रीय समुदाय से तत्काल मदद की अपील

ग़ज़ा के स्वास्थ्य मंत्रालय ने संयुक्त राष्ट्र और अंतरराष्ट्रीय समुदाय से अपील की है कि ग़ज़ा में खाद्य सामग्री, दवाइयों और कुपोषण के इलाज में इस्तेमाल होने वाले पोषक आहार की सुरक्षित, निरंतर और बिना रुकावट आपूर्ति सुनिश्चित की जाए। मंत्रालय ने बच्चों, गर्भवती एवं स्तनपान कराने वाली महिलाओं और बुज़ुर्गों को प्राथमिकता देने की माँग की है। साथ ही, स्थानीय खाद्य उत्पादन को बहाल करने पर भी ज़ोर दिया है। ग़ज़ा में गहराता खाद्य संकट आम नागरिकों, ख़ासकर बच्चों और कमज़ोर तबक़ों की ज़िंदगी पर पड़ रहे गंभीर असर को उजागर करता है। इस संकट से निपटने के लिए मानवीय सहायता की निर्बाध पहुँच और स्वास्थ्य सेवाओं की उपलब्धता बेहद ज़रूरी है।

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