इस्लामाबाद: पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की गाजा में शांति स्थापना के लिए पेश की गई 20 सूत्रीय योजना का समर्थन किया| इस समर्थन ने देश में उन्हें भारी आलोचना और नाराजगी का सामना करवा दिया , शहबाज ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर ट्रंप के गाजा प्लान की सराहना करते हुए लिखा कि इस योजना का उद्देश्य गाजा युद्ध को समाप्त करना है और यह स्थायी शांति और क्षेत्रीय राजनीतिक व आर्थिक स्थिरता के लिए आवश्यक है।
शहबाज ने अपने ट्वीट में लिखा कि उन्हें पूरा भरोसा है कि राष्ट्रपति ट्रंप इस महत्वपूर्ण और तात्कालिक समझौते को वास्तविकता में बदलने के लिए पूरी तरह तैयार हैं। उन्होंने विशेष दूत स्टीव विटकॉफ की भूमिका की भी प्रशंसा की और यह भी कहा कि टू-स्टेट सॉल्यूशन को लागू करना इस क्षेत्र में स्थायी शांति के लिए बेहद जरूरी है।
शहबाज के सुर बदलने पर आलोचना:
इस बयान के बाद पाकिस्तान में उनके प्रति भारी नाराजगी देखी गई। देश के कई नागरिकों और सोशल मीडिया यूजर्स ने उन्हें ट्रंप और इजरायल के समर्थन का दोषी ठहराया।
उनके इस समर्थन के बाद पाकिस्तानी यूज़र्स ने लिखा कि 66,000 शहीद फिलिस्तीनियों की लाशों पर खड़े होकर शांति प्रस्ताव की तारीफ करना गुनहगारों का साथ देने जैसा है। उन्होंने शहबाज पर पाकिस्तानियों की सहमति के बिना फैसला लेने का आरोप लगाया।
जिम्मी वर्क ने शहबाज को ‘क्राइम-मिनिस्टर’ कहकर आलोचना की और पूछा कि टू-स्टेट सॉल्यूशन की बात करते हुए वे खुद समझते भी हैं कि फिलिस्तीनियों के लिए कौन-सी जगह बची है।
Sajjad ur rehaman नामक यूजर ने लिखा “”अगर तुम यहूदी एजेंट हो और इज़राइल के साथ दोस्ती कर रहे हो, तो हम इसे पाकिस्तान के नाम पर कड़ी निंदा करते हैं। हम इज़राइल को कभी भी एक राज्य के रूप में स्वीकार नहीं करेंगे।”
AyeshaSiddiqi कहतीं है “क्या शहबाज शरीफ को याद नहीं कि पाकिस्तान ने कभी इजरायल को मान्यता नहीं दी? अब वे खुद इजरायल के साथ खड़े हैं?”
ImranAli ने लिखा “66,000 शहीदों की कुर्बानी के बाद, शहबाज शरीफ ने ट्रंप के गाजा प्लान को स्वीकार करके उनका अपमान किया है।”
Markhoor अपनी प्रतिकिर्या देते हुए कहते है “”ग़ाज़ा के मासूम बच्चों का खून अपने सिर मत लो। अगर अमेरिका तुम्हारा दुश्मन है तो सावधान रहो, अगर दोस्त है तो और भी सतर्क रहो। जो तुम कर रहे हो, उसे सिर्फ सवाब समझकर मत करो।”
Saudiguru के अनुसार “पाकिस्तान अमेरिका, चीन और सऊदी अरब के साथ अच्छे संबंध बना रहा है, जबकि भारत का कोई दोस्त नहीं है और वह विश्व मंच पर बहुत अलग-थलग है, हालात कैसे बदल गए हैं?”
SaraAli ने कहा “क्या शहबाज शरीफ ने कभी पाकिस्तान की जनता से इस मुद्दे पर राय ली थी? यह उनका व्यक्तिगत निर्णय नहीं, बल्कि देश की नीति होनी चाहिए थी।”
सिदरा हिजाजी ने कहा कि शहबाज इजरायल समर्थक डेलीगेट्स के साथ अमेरिका गए और अब उन्हीं गासिबों को मान्यता दे बैठे हैं, जबकि पहले इमरान खान को इजरायली एजेंट कहकर आलोचना की जाती थी।
एक अमेरिकी पाकिस्तानी यूजर ने लिखा, ‘यह कोई जंग नहीं है, यह नरसंहार है। मासूम मुसलमानों और बच्चों के नरसंहार पर सौदा किया गया।’
जनता में गहरी नाराजगी :
पाकिस्तान के कई नागरिकों ने शहबाज के बयान को देश और इस्लामी मूल्यों के खिलाफ करार दिया। एक यूजर ने कहा, ‘आपके अपने देश में कोई आपकी बात नहीं मानता। फिर आप किस हक से फिलिस्तीन के लिए फैसले कर रहे हैं?’ वहीं, एक महिला यूजर ने कहा कि शहबाज अफगानिस्तान युद्ध के दौरान पश्चिमी ताकतों के गंदे काम दोहराने में जुटे हैं और मुस्लिम मुल्क होने का दावा बस नाम का रह गया है।
पृष्ठभूमि :
ट्रंप का 20 सूत्रीय गाजा प्लान इजरायल और फिलिस्तीन के बीच स्थायी शांति की दिशा में एक कोशिश माना जा रहा है। योजना के तहत इजरायल को गाजा में सैन्य कार्रवाई रोकनी होगी, हमास को हथियार डालने होंगे और मानवाधिकारों की बहाली सुनिश्चित करनी होगी। हालांकि इस योजना का पाकिस्तान की पारंपरिक फिलिस्तीन नीति और जनता की भावनाओं से विरोधाभास है, क्योंकि पाकिस्तान ने अब तक इजरायल को स्वतंत्र राष्ट्र के रूप में मान्यता नहीं दी है।
विश्लेषण :
शहबाज शरीफ का यह समर्थन उनके राजनीतिक दृष्टिकोण में बदलाव को दर्शाता है, लेकिन देश की जनता और राजनीतिक विश्लेषकों के बीच इसे विश्वासघात और राष्ट्रहित के खिलाफ माना जा रहा है। पाकिस्तान में फिलिस्तीन समर्थक भावनाएं गहरी हैं और किसी भी कदम को जो इजरायल के समर्थन में दिखे, उसे तीखी आलोचना का सामना करना पड़ता है।
निष्कर्ष :
शहबाज शरीफ का ट्रंप के गाजा शांति प्रस्ताव का समर्थन पाकिस्तान में राजनीतिक और सार्वजनिक स्तर पर विवाद का कारण बना है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह कदम पाकिस्तान की पारंपरिक विदेश नीति से विचलन को दर्शाता है और क्षेत्रीय राजनीति में नई दिशा की ओर संकेत करता है।
