गाज़ा: पत्रकारों के लिए मौत की धरती

गाज़ा अब दुनिया में पत्रकारों के लिए सबसे खतरनाक जगह बन चुका है। The Guardian में छपी रिपोर्ट के अनुसार, पिछले दो सालों में यहां 223 फ़लस्तीनी पत्रकार अपनी जान गंवा चुके हैं। इनमे युवा रिपोर्टर अनस अल-शरीफ़ भी शामिल हैं, जिन्हें 10 अगस्त 2025 को इसराइली हमले में मार दिया गया।

फ्रांसीसी-बेल्जियन पत्रकार और इतिहासकार एंथनी बेलांज़र का कहना है कि ये मौतें किसी हादसे का नतीजा नहीं बल्कि एक सोची-समझी रणनीति हैं। उनका आरोप है कि इसराइल जानबूझकर गवाहों को ख़ामोश कर रहा है, ताकि गाज़ा की सच्चाई दुनिया तक न पहुँच पाए।

इसके अलावा भी इसराइल ने विदेशी पत्रकारों के प्रवेश पर रोक लगाई हुई है। ऐसे में केवल फ़लस्तीनी पत्रकार ही अपने लोगों की पीड़ा दुनिया को दिखा रहे हैं। लेकिन वे बिना किसी सुरक्षा के काम करते हैं और अक्सर अपने परिवारों समेत सीधी गोलीबारी के निशाने पर आ जाते हैं।

अंतर्राष्ट्रीय पत्रकार महासंघ (IFJ) का कहना है कि पत्रकारों की इतनी बड़ी संख्या में हत्या द्वितीय विश्व युद्ध, वियतनाम, अफ़ग़ानिस्तान या इराक़ जैसे युद्धों में भी नहीं हुई। संगठन ने संयुक्त राष्ट्र से अपील की है कि पत्रकारों की सुरक्षा और उनके कातिलों की सज़ा के लिए अंतर्राष्ट्रीय कानून बनाए जाएं।

बेलांज़र चेतावनी देते हैं:
“पत्रकारों को मारना सच को मारना है। और जब सच मारा जाता है, तो दुनिया जल्लादों के हाथों में चली जाती है।”

प्रातिक्रिया दे

आपका ईमेल पता प्रकाशित नहीं किया जाएगा. आवश्यक फ़ील्ड चिह्नित हैं *