पाकिस्तान प्रशासित कश्मीर में विरोध प्रदर्शन जारी, भारत ने जताई चिंता

पाकिस्तान प्रशासित कश्मीर (पीएके) में लगातार पांचवें दिन विरोध प्रदर्शन और हड़ताल जारी रही। इस दौरान सभी बाजार, सड़कें और सार्वजनिक परिवहन बंद रहे। प्रदर्शनकारियों और सुरक्षा बलों के बीच कई जगह झड़पें हुईं, जिसमें अब तक नौ नागरिकों और तीन पुलिसकर्मियों की मौत की खबर सामने आयी है।

यह विरोध जम्मू-कश्मीर जॉइंट आवामी एक्शन कमेटी (जेकेजेएएसी) के आह्वान पर शुरू हुआ। कमेटी ने 38 सूत्री मांग पत्र में कई मुद्दों को उठाया है, जैसे कि सरकारी खर्च में कटौती, मुफ्त शिक्षा और स्वास्थ्य सुविधाएं, अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे की स्थापना, आरक्षित विधानसभा सीटों में बदलाव और कश्मीरी अभिजात वर्ग के विशेषाधिकारों में कमी। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि सरकार दो साल पहले हुए समझौते को पूरी तरह लागू करने में असफल रही।

पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज़ शरीफ़ ने स्थिति पर ‘गहरी चिंता’ जताई और प्रदर्शनकारियों से शांतिपूर्ण रहने की अपील की। उन्होंने पुलिस को संयम बरतने का निर्देश दिया और बातचीत के लिए एक समिति बनाई। पीएके के प्रधानमंत्री चौधरी अनवारुल हक़ और संघीय मंत्री तारिक फज़ल चौधरी ने कहा कि प्रदर्शनकारियों की 90 प्रतिशत मांगें स्वीकार की जा चुकी हैं, लेकिन आरक्षित सीटों और अभिजात वर्ग के विशेषाधिकारों पर अभी भी विवाद है।

इसके अलावा भारतीय विदेश मंत्रालय ने इस स्थिति पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि यह पाकिस्तान के दमनकारी रवैये का नतीजा है। प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने बताया कि पीके में निर्दोष नागरिकों पर पाकिस्तान सेना की बर्बरता की रिपोर्टें मिली हैं और पाकिस्तान को मानवाधिकार उल्लंघनों के लिए जवाबदेह ठहराया जाना चाहिए।

प्रदर्शनकारियों और सरकार के बीच बातचीत जारी है, लेकिन हिंसा और तनावपूर्ण माहौल के कारण स्थिति अभी भी गंभीर बनी हुई है। प्रशासन ने कुछ इलाकों में इंटरनेट, मोबाइल और सोशल मीडिया सेवाओं को आंशिक रूप से बंद कर दिया है।

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