केरल की 46 वर्षीय जलीना हुसैन ने अपनी लगन, कला और आस्था के सहारे वो कर दिखाया, जिसकी दुनिया भर में चर्चा हो रही है। उन्होंने पूरे एक साल तक दिन-रात लगातार मेहनत करके 30 किलो वज़न वाला हस्तलिखित क़ुरआन तैयार दिया। खूबसूरत अरबी क़लिग्राफी में लिखे गए इस पवित्र ग्रंथ में 604 पन्ने हैं और सभी 114 सूरहें बेहद सलीके और सम्मान के साथ दर्ज की गई हैं।
जलीना की यह महान रचना Sharjah International Book Fair में प्रदर्शित की गई, जहां इसे देखने वाले लोग उनकी कला और समर्पण से प्रभावित हुए। इस क़ुरआन का कवर नक्काशीदार टीक की लकड़ी से बनाया गया है, जिसका डिज़ाइन भी जलीना ने स्वयं तैयार किया। पेंटेड कवर सहित इसका कुल वजन लगभग 54 किलो पहुँच गया।
जलीना पहले रबर प्लांटेशन में काम करती थीं और बाद में स्कूलों में उर्दू पढ़ाती थीं। कला के प्रति उनका प्रेम और क़ुरआन के प्रति उनकी आस्था ने उन्हें इस असाधारण यात्रा तक पहुँचाया। उनकी इस उपलब्धि को कई रिकॉर्ड बुक्स ने भी मान्यता दी है।
जलीना की यह कहानी साबित करती है कि सच्ची लगन और समर्पण से कोई भी सपना पूरा किया जा सकता है—चाहे वह कितना ही बड़ा क्यों न हो।
