संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार उच्चायुक्त कार्यालय (OHCHR) ने क़ाबिज़ पश्चिमी तट में इसराइली सीमा पुलिस द्वारा दो फ़लस्तीनी व्यक्तियों को खुलेआम जान से मार दिए जाने की घटना पर गहरा क्षोभ प्रकट किया है.
यूएन कार्यालय के प्रवक्ता जर्मी लॉरेन्स ने जिनीवा में पत्रकारो को बताया कि यह घटना जेनिन में हुई और ऐसा प्रतीत होता है कि यह एक टीवी चैनल पर रिकॉर्ड हो गई थी.
OHCHR ने इसकी निन्दा करते हुए इसे बिना किसी क़ानूनी सुनवाई के जान से मार दिए जाने की घटना क़रार दिया है.
यूएन कार्यालय प्रवक्ता के अनुसार, इस घटना के बाद आन्तरिक समीक्षा किए जाने की घोषणा की गई है, लेकिन एक वरिष्ठ इसराइली अधिकारी के वक्तव्य में ‘सुरक्षा बलों की ज़िम्मेदारी से पल्ला झाड़ने की कोशिश की गई है’.
“इससे भविष्य में किसी समीक्षा की विश्वसनीयता या एक ऐसी संस्था द्वारा जाँच के प्रति गहरी चिन्ताएँ हैं, जोकि पूर्ण रूप से सरकार से स्वतंत्र न हो.”
OHCHR प्रवक्ता ने ध्यान दिलाया कि क़ाबिज़ पश्चिमी तट में इसराइली सुरक्षाकर्मियों और इसराइली बस्तियों के निवासियों द्वारा फ़लस्तीनियों को जान से मारने की घटनाओं में वृद्धि हुई है, जबकि इन घटनाओं की जवाबदेही तय नहीं की जा रही है.
मानवाधिकार कार्यालय ने 7 अक्टूबर 2023 के बाद से अब तक, ऐसी घटनाओं में 1,030 फ़लस्तीनियों के मारे जाने की पुष्टि की है, जिनमें 233 बच्चे भी हैं. दो वर्ष पहले, इस दिन हमास व अन्य हथियारबन्द गुटों ने इसराइल पर हमले किए थे, जिसके बाद इसराइली कार्रवाई में ग़ाज़ा में बड़े पैमाने पर जान-माल की हानि हुई है.
क़ाबिज़ पश्चिमी तट में हिंसक घटनाओं के बीच आम लोगों का हताहत, विस्थापित होना जारी है. फ़लस्तीनियों की आवाजाही पर सख़्ती है, हज़ारों लोगों को कर्फ्यू में रहना पड़ रहा है और अनेक अन्य पर ऐसी पाबन्दियाँ थोपी गई हैं, जिससे उनके लिए अपने कार्यस्थल, स्कूल या अन्य आवश्यक सेवाओं तक पहुँचना कठिन हो गया है.
उन्होंने कहा कि “इसराइली सुरक्षा बलों द्वारा ग़ैरक़ानूनी ढंग से बल प्रयोग के लिए दंडमुक्ति, और इसराइली बाशिन्दों द्वारा बढ़ती हिंसा का तुरन्त अन्त करना होगा.”
यूएन मानवाधिकार उच्चायुक्त वोल्कर टर्क ने ऐसी घटनाओं की स्वतंत्र, कारगर जाँच कराए जाने और दोषियों को न्याय के कटघरे में लाने का आग्रह किया है.

ग़ाज़ा में चिन्ताजनक स्थिति
इस बीच, यूएन मानवतावादी कार्यालय (OCHA) ने जानकारी दी है कि ग़ाज़ा में इसराइल और हमास के बीच युद्धविराम के बावजूद, यूएन कर्मचारी और प्रतिष्ठान अब भी गोलीबारी की चपेट में आ रहे हैं.
फ़लस्तीनी शरणार्थियों के लिए यूएन एजेंसी (UNRWA) द्वारा ग़ाज़ा के उत्तरी हिस्से में संचालित एक स्कूल के अहाते में सोमवार को बमबारी हुई.
उसके अगली रात, हथियारबन्द फ़लस्तीनियों के एक समूह ने डेयर अल-बलाह में परियोजना सेवाओं के लिए यूएन कार्यालय की एक टीम पर गोलियाँ चलाईं. स्पष्ट रूप से चिन्हित एक वाहन परं अनेक गोलियाँ दागी गईं. इन घटनाओं में किसी के घायल होने का समाचार नहीं है.
सहायता प्रयास जारी
इन जोखिमों के बावजूद, संयुक्त राष्ट्र अपने साझेदार संगठनों के साथ मिलकर ग़ाज़ा में ज़रूरतमन्द समुदायों तक मानवीय सहायता व सेवाएँ पहुँचाने में जुटा है.
रविवार से मंगलवार तक, 18 हज़ार से अधिक परिवारों को उनके मासिक भोजन पैकेट प्रदान किए गए हैं. नवम्बर की शुरुआत से अब तक, दो लाख से अधिक परिवारों को, यानि ग़ाज़ा की क़रीब आधी आबादी तक ये पैकेट पहुँचाए गए हैं.
वहीं, पोषण सेवाओं का दायरा व स्तर बढ़ाने के लिए भी कोशिशें हो रही हैं. ग़ाज़ा में कुपोषण के उपचार के लिए अब तक 40 केन्द्र स्थापित किए जा चुके हैं.
कुँओं, जल आपूर्ति पाइपलाइन व सीवर व्यवस्था की बहाली व ज़रूरी मरम्मत की जा रही है और मेडिकल केन्द्रों में प्रजनन स्वास्थ्य किट व दवाएँ वितरित की गई हैं, ताकि अगले तीन महीनों में सुरक्षित प्रसव सुनिश्चित किए जा सकें.
Source: UN News
