क्या आप सोच सकते हैं कि सिर्फ 13 साल की उम्र में एक मुलाकात किसी के पूरे जीवन को बदल सकती है? 1974 में, तज़ाइयुन ऊमर संसद भवन गई थीं और वहां उन्हें इंदिरा गांधी से मिलने का मौका मिला। उस छोटे से पल ने उनमें आत्मविश्वास और नेतृत्व की पहली चिंगारी जलाई। यह छोटी शुरुआत आगे चलकर हजारों महिलाओं और बच्चों की जिंदगी बदलने वाली कहानी बन गई।
अंग्रेज़ी साहित्य में मास्टर्स करने के बाद, तज़ाइयुन ने 1999 में Humane Touch की स्थापना की। यह संगठन विशेष जरूरतों वाले बच्चों के लिए सुधारात्मक सर्जरी, कैलिपर्स और पुनर्वास की सुविधा देता है। इसके ज़रिये अब तक 100 से अधिक बच्चों को मदद मिल चुकी है।
इसके अलावा 2000 में उन्होंने गउरीपाल्या में Adult Education Centre खोला, और वयस्क साक्षरता के जरिए समुदाय को सशक्त बनाया। 2004 में Al-Azhar School और mass weddings शुरू किए। 21 वर्षों में 1,750 शादियां कराकर उन्होंने परिवारों का आर्थिक बोझ कम किया और उन्हें गरिमा के साथ जीवन जीने का मौका दिया।
2007 में Lifeline Foundation के जरिए 2,000 से अधिक मुस्लिम महिलाओं को उद्यमिता, कौशल प्रशिक्षण और वित्तीय समझ दी गई। हर साल 300 छात्राओं को स्कॉलरशिप देकर उन्होंने शिक्षा को सबसे शक्तिशाली हथियार बनाया।
आज भी तज़ाइयुन finishing school जैसी नई पहलों से महिलाओं और बच्चों को आत्मनिर्भर बनाने का काम कर रही हैं। उनका मानना है: “सशक्तिकरण वही है, जो लोगों को गरिमा और आत्मनिर्भरता के साथ जीने की शक्ति दे।”
