ग़ाज़ा की सरहद पर स्थित रफ़ा क्रॉसिंग को लेकर “इज़राइल” की कथित योजना के खिलाफ़ आठ बड़े अरब और इस्लामी देशों ने एकजुट होकर सख़्त रुख अपनाया है। मिस्र, जॉर्डन, UAE, इंडोनेशिया, पाकिस्तान, तुर्किये, सऊदी अरब और क़तर ने चेतावनी दी है कि फ़िलिस्तीनियों को ग़ाज़ा से बाहर धकेलने की किसी भी कोशिश को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। विदेश मंत्रियों ने इसे ग़ाज़ा की जनसंख्या बदलने की खतरनाक कोशिश बताते हुए दो-टूक यानी साफ़ और स्पष्ट तौर पर कहा कि फ़िलिस्तीनियों के अधिकारों और उनकी जमीन पर किसी भी तरह का अतिक्रमण मंज़ूर नहीं।
मंत्रियों ने मांग की कि रफ़ा क्रॉसिंग दोनों दिशाओं में पूरी तरह खुला रहे, जैसा कि ट्रम्प की शांति योजना में तय किया गया था। उनका कहना है कि फ़िलिस्तीनियों की आवाजाही पर किसी भी दबाव या रोक को तुरंत बंद किया जाना चाहिए, ताकि लोग अपनी ही सरज़मीं पर सुरक्षित और सम्मानजनक जीवन जी सकें।
उन्होंने युद्धविराम को मज़बूत करने, मानवीय सहायता को बिना रुकावट पहुँचाने और ग़ाज़ा के पुनर्निर्माण की तत्काल शुरुआत की भी अपील की। साथ ही, ग़ाज़ा में फ़िलिस्तीनी अथॉरिटी की वापसी को स्थिरता की दिशा में ज़रूरी कदम बताया।
उधर फ़िलिस्तीन के राजनीतिक और सामाजिक समूहों ने अंतरराष्ट्रीय मध्यस्थों से अपील की है कि रफ़ा क्रॉसिंग को बिना रोक-टोक दोनों दिशाओं में खोला जाए और UNSC प्रस्ताव 2803 को सख़्ती से लागू कराया जाए, ताकि ग़ज़ा को किसी नई घेराबंदी या दबाव का सामना न करना पड़े।
