सोशल मीडिया पर भारतीय नौसेना प्रमुख एडमिरल दिनेश कुमार त्रिपाठी से जुड़ा एक वीडियो तेजी से वायरल हो रहा है। इस वीडियो में दावा किया जा रहा है कि नेवी चीफ ने आधुनिक युद्ध को “50/50 का जुआ” बताया है और कहा है कि सबसे अच्छी रणनीति युद्ध में शामिल न होना है। वीडियो में युद्ध की तुलना पोकर गेम से किए जाने और वायु सेना द्वारा “यह सबक कठिन तरीके से सीखने” की बात भी जोड़ी गई है।
पाकिस्तानी यूजर ने इस वीडियो को शेयर कर लिखा,“CNS एडमिरल दिनेश कुमार त्रिपाठी- “युद्ध का मौजूदा ढांचा दोतरफा है। यह आपकी तरफ जा सकता है या आपके दुश्मन की तरफ, तो आप मुझसे सबसे अच्छी रणनीति के बारे में पूछ रहे हैं? सबसे अच्छी रणनीति है इसमें शामिल न होना, क्योंकि 50/50 चांस रहता है कि युद्ध आप जीतेंगे या आपका दुश्मन। इसे पोकर गेम की तरह सोचिए, एयरफोर्स ने पोकर खेला और उन्होंने यह मुश्किल तरीके से सीखा।” (हिन्दी अनुवाद)

फैक्ट चेक में क्या सामने आया?
Times Headline की टीम ने वायरल वीडियो की गहन जांच की। जांच में यह स्पष्ट हुआ कि वीडियो डिजिटली एडिटेड और भ्रामक है। भारतीय नेवी चीफ ने न तो युद्ध को 50/50 का जुआ कहा है और न ही युद्ध से दूर रहने या पोकर गेम से तुलना करने जैसा कोई बयान दिया है।
रिसर्च में हमारी टीम को एडमिरल दिनेश कुमार त्रिपाठी का ओरिजिनल बयान न्यूज एजेंसी IANS के आधिकारिक एक्स (पूर्व ट्विटर) अकाउंट पर मिला। इस वीडियो में नेवी चीफ ने कहा था कि “रांची, झारखंड: CNS दिनेश के. त्रिपाठी ने कहा, “…जैसा कि मैंने बताया, ऑपरेशन सिंदूर अभी चल रहा है। भारतीय नौसेना एक सीखने वाली संस्था है, इसलिए हम दूसरों से भी सीखना चाहते हैं…” (हिन्दी अनुवाद)
वायरल वीडियो और असली बयान में अंतर
ओरिजिनल वीडियो में नेवी चीफ रणनीतिक और पेशेवर संदर्भ में बात करते नजर आते हैं। उन्होंने न तो युद्ध से बचने की सलाह दी, न ही किसी प्रकार की जीत-हार की संभावनाओं को जुए से जोड़ा और न ही वायु सेना पर कोई टिप्पणी की।
वायरल क्लिप में उनके शब्दों को काट-छांट कर और ऑडियो/वीडियो में छेड़छाड़ कर गलत नैरेटिव गढ़ा गया है।
निष्कर्ष
Times Headline के फैक्ट चेक से यह साफ हो जाता है कि सोशल मीडिया पर भारतीय नौसेना प्रमुख एडमिरल दिनेश कुमार त्रिपाठी के नाम से फैलाया जा रहा वीडियो पूरी तरह फर्जी और डिजिटली अल्टर्ड है। युद्ध, 50/50 संभावनाओं या पोकर गेम से तुलना वाला दावा बेबुनियाद है।
सोशल मीडिया यूजर्स का दावा गलत और भ्रामक है।
