ग़ाज़ा में राहत और पुनर्निर्माण के लिए पहुँच अब भी पर्याप्त नहीं

संयुक्त राष्ट्र विकास कार्यक्रम (UNDP) के मुखिया अलेक्ज़ैंडर डे क्रू ने कहा है कि ग़ाज़ा में राहत और पुनर्निर्माण कार्यों को बढ़ाने के लिए, संयुक्त राष्ट्र के पास पर्याप्त धन और क्षमता है, मगर ज़रूरतमन्द लोगों तक मानवीय सहायता पहुँचाने के लिए आवश्यक पहुँच नहीं है.

UNDP प्रमुख अलेक्ज़ैंडर डे क्रू ने, नवम्बर 2025 में यह पद सम्भालने के बाद अपनी पहली विदेश यात्रा के लिए ग़ाज़ा को चुना.

उन्होंने यूएन एजेंसियों के लिए अधिक पहुँच दिए जाने की आवश्यकता पर बल दिया, जिससे मलबा और कचरा हटाने, आश्रय और चिकित्सा उपकरण उपलब्ध कराने और मरीजों को सुरक्षित निकालने के प्रयासों को मज़बूत बनाया जा सके.

लाखों टन कचरा हटाने का प्रयास

UNDP प्रमुख ने ग़ाज़ा सिटी स्थित फ़िरास बाज़ार का दौरा किया, जहाँ दो साल के युद्ध के दौरान लगभग 3.7 लाख टन कचरा जमा हो गया.

यह क्षेत्र, कचरे के भंडार एकत्र होने और सीवेज प्रणाली के ध्वस्त होने के कारण एक विशाल, बदबूदार कूड़ेदान में तब्दील हो गया है.

UNDP के बुलडोज़रों ने, एक सप्ताह पहले कचरा हटाने का काम शुरू किया, जिससे फ़लस्तीनीयों में आशा की किरण जागी है. 

इस प्रयास का उद्देश्य बाज़ार को फिर से आर्थिक केन्द्र के रूप में खोलना है.

साथ ही, यह संगठन आश्रय, बुनियादी सेवाओं, शिक्षा और स्वास्थ्य जैसी आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए भी प्रयासरत है.

बदतरीन हालात

UNDP प्रमुख ने ग़ाज़ा और पश्चिमी तट की अपनी तीन दिन की यात्रा के बाद, पत्रकारों को बताया कि, ग़ाज़ा में हालात अब तक उनकी स्मृति में सभी परिस्थितियों में सबसे बदतर हैं, और अब तक वहाँ मौजूद कुल मलबे का केवल 0.5 प्रतिशत ही हटाया जा सका है.

बैल्जियम सरकार में विकास मंत्री रह चुके अलेक्ज़ैंडर डे क्रू ने कहा कि “इस गति से मलबा हटाने में 7 साल लग जाएँगे.” 

“हमें मलबा हटाने और रीसायकलिंग की क्षमता बढ़ाने की आवश्यकता है. आज ग़ाज़ा के लगभग 90 प्रतिशत लोग इसी मलबे के बीच रह रहे हैं, जो बेहद ख़तरनाक है.”

ग़ाज़ा के अधिकांश लोग अब भी अस्थाई तम्बुओं में रह रहे हैं, जिन्हें UNDP अब पुनर्निर्माण आवास इकाइयों से बदलना शुरू कर रहा है.

फ़िलहाल 4 हज़ार आवास इकाइयाँ बनकर तैयार हो चुकी हैं, मगर कुल जनसंख्या के लिए लगभग 3 लाख इकाइयों की आवश्यकता है.

यूएन वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि “हम समझते हैं कि इसराइली अधिकारियों की सुरक्षा सम्बन्धी चिंताएँ हैं, लेकिन ये चिन्ताएँ, UNDP, अन्य संयुक्त राष्ट्र संस्थाओं और अन्तरराष्ट्रीय गै़र-सरकारी संगठनों को पहुँच से वंचित करने का कारण नहीं होना चाहिए.”

Source : UN News Hindi

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