कोलंबिया के राष्ट्रपति गुस्तावो पेट्रो ने देश के हालिया राष्ट्रपति चुनाव को लेकर बेहद गंभीर आरोप लगाए हैं। उनका कहना है कि चुनावी प्रक्रिया के दौरान इस्तेमाल किए गए सॉफ्टवेयर के साथ छेड़छाड़ की गई और इसके पीछे इज़राइल का हाथ हो सकता है।
पेट्रो के मुताबिक, राष्ट्रीय रजिस्ट्री के कई सर्वरों के IP एड्रेस बदले गए, जिससे यह आशंका पैदा होती है कि चुनावी डेटा में बाहरी हस्तक्षेप हुआ। उन्होंने दावा किया कि इससे मतदान केंद्रों और पोलिंग स्टेशनों का डेटा प्रभावित किया जा सकता था।
राष्ट्रपति ने पूरे मामले की स्वतंत्र फॉरेंसिक जांच, न्यायिक निगरानी और देशभर में वोटों की दोबारा गिनती की मांग की है। उनका कहना है कि जब तक आधिकारिक स्क्रूटनी प्रक्रिया पूरी नहीं हो जाती, तब तक किसी भी उम्मीदवार को राष्ट्रपति घोषित नहीं किया जा सकता।
गौरतलब है कि प्रारंभिक नतीजों में दक्षिणपंथी उम्मीदवार अबेलार्डो डे ला एस्प्रिएला 49.66% वोटों के साथ आगे बताए गए हैं, जबकि वामपंथी सीनेटर इवान सेपेडा को 48.70% वोट मिले हैं। हालांकि सेपेडा 30,000 से अधिक मतदान केंद्रों के नतीजों को चुनौती देने की तैयारी कर रहे हैं।
पेट्रो के आरोप ऐसे समय में सामने आए हैं जब कुछ ही सप्ताह पहले फ्रांस में भी कथित विदेशी चुनावी हस्तक्षेप की जांच शुरू हुई थी। फ्रांसीसी जांच एजेंसियां इज़राइल से जुड़ी बताई जाने वाली साइबर और प्रभाव संचालन कंपनी ब्लैककोर की भूमिका की जांच कर रही हैं। हालांकि अब तक यह स्पष्ट नहीं हो सका है कि इन अभियानों के पीछे कौन था।
रिपोर्ट में यह भी याद दिलाया गया है कि कैम्ब्रिज एनालिटिका विवाद के दौरान इज़राइल से जुड़ी निजी खुफिया कंपनियों पर भी चुनावी हस्तक्षेप के आरोप लगे थे, जिससे चुनावों में विदेशी प्रभाव और डिजिटल हस्तक्षेप को लेकर बहस फिर तेज हो गई है।
अब सबकी नजर कोलंबिया की आधिकारिक स्क्रूटनी प्रक्रिया और संभावित फॉरेंसिक जांच पर टिकी है, जो तय करेगी कि राष्ट्रपति पेट्रो के आरोपों में कितना दम है।
