इसराइली बलों ने ‘जानबूझकर’ फ़लस्तीनी बच्चों के विरुद्ध अत्याचारों को दिया अंजाम

क़ाबिज़ फ़लस्तीनी इलाक़े में मानवाधिकारों की स्थिति पर संयुक्त राष्ट्र के स्वतंत्र अन्तरराष्ट्रीय जाँच आयोग ने बताया है कि ग़ाज़ा पट्टी और पश्चिमी तट में इसराइली सुरक्षा बलों द्वारा सोचे-समझे ढंग से फ़लस्तीनी बच्चों को निशाना बनाए जाने की घटनाएँ हुई हैं, जिनके परिणामस्वरूप जनसंहार, मानवता के विरुद्ध अपराध और युद्ध अपराधों को अंजाम दिया गया.

अन्तरराष्ट्रीय जाँच आयोग ने मंगलवार को जारी अपनी एक नई रिपोर्ट में यह निष्कर्ष साझा किया है. इससे पहले, पिछले वर्ष प्रकाशित रिपोर्ट में भी ग़ाज़ा पट्टी में फ़लस्तीनी समूहों के विरुद्ध जनसंहार को अंजाम दिए जाने की बात कही गई थी.

रिपोर्ट के अनुसार, इसराइली सुरक्षा बलों ने विशाल पैमाने पर और व्यवस्थागत ढंग से सैन्य कार्रवाई की, जिसकी वजह से अभूतपूर्व स्तर पर फ़लस्तीनी बच्चे मारे गए, घायल और सदमे का शिकार हुए.

जाँच आयोग ने दोहराया है कि बच्चों को जानबूझकर निशाना बनाया जाना, इसराइली प्रशासन और सुरक्षा बलों द्वारा ग़ाज़ा में आंशिक व पूर्ण रूप से फ़लस्तीनी समूहों को तबाह करने की जनसंहारक मंशा को दर्शाता है.

यूएन मानवाधिकार परिषद ने पूर्वी येरूशलम समेत क़ाबिज़ फ़लस्तीनी इलाक़े में संयुक्त राष्ट्र स्वतंत्र अन्तरराष्ट्रीय जाँच आयोग को मई 2021 में स्थापित किया था, और इसका दायित्व इसराइल और क़ाबिज़ फ़लस्तीनी इलाक़े में अन्तरराष्ट्रीय मानवतावादी व मानवाधिकार क़ानून के कथित उल्लंघन व दुर्व्यवहार मामलों की जाँच करना है. 

तबाह हुआ बचपन

स्वतंत्र अन्तरराष्ट्रीय जाँच आयोग के प्रमुख श्रीनिवासन मुरलीधर ने कहा कि अक्टूबर 2025 में ग़ाज़ा में युद्धविराम लागू होने के बाद भी, हमलों में बच्चों की अब भी जान जा रही है और वे गम्भीर रूप से घायल हो रहे हैं. इसराइल द्वारा युद्धविराम और अन्तरराष्ट्रीय क़ानून के अन्तर्गत बच्चों की सुरक्षा के दायित्व के प्रति बेपरवाही अब भी जारी है.

मानवाधिकार विशेषज्ञों ने चिन्ता जताई है कि बच्चे, गम्भीर रूप से शारीरिक व मानसिक घावों, सामूहिक सदमे, अनाथ या परिवार से अलग होने, विकलांगता, बार-बार विस्थापन, भुखमरी का शिकार हुए हैं. उनके लिए शिक्षा व स्वास्थ्य देखभाल सेवाएँ ध्वस्त हो गई हैं, जिसने उनके बचपन को बर्बाद कर दिया है.

रिपोर्ट बताती है कि फ़लस्तीनी बच्चों को गिरफ़्तार किया गया, उन्हें यातना दी गई, इसराइली बन्दीगृह व हिरासत केन्द्रों में अनेक प्रकार से बुरा बर्ताव किया गया, और परिजन को यह सूचना भी नहीं दी गई कि उन्हें कहाँ रखा गया.

जाँच आयोग ने बताया कि सामूहिक स्तर पर कथित रूप से शर्मसार व दमन करने के लिए, इसराइली सुरक्षा बलों द्वारा बच्चों के विरुद्ध यौन हिंसा का इस्तेमाल किया गया.

रिपोर्ट के अनुसार, इसराइल द्वारा प्रसव के पश्चात और मातृत्व स्वास्थ्य देखभाल केन्द्रों को निशाना बनाए जाने से नवजात शिशुओं और फ़लस्तीनियों के प्रजनन भविष्य व आबादी बढ़ने को सीधे तौर पर नुक़सान पहुँचा. इस दौरान, अनैच्छिक गर्भपात (miscarriage), जन्मजात विकार समेत अन्य स्वास्थ्य समस्याओं में उछाल दर्ज किया गया.

फ़लस्तीनी समाज की बुनियाद पर असर

इसराइली सेना की घेराबन्दी व नाकेबन्दी से उपजी भुखमरी, फ़लस्तीनी बच्चों की मौतों की वजह बनी और वे कुपोषण का भी शिकार हुए, वहीं अनाथालयों व शैक्षणिक स्थलों के ध्वस्त होने से उनके विकास पर असर हुआ, मनोवैज्ञानिक चोट पहुँची और फ़लस्तीनी समाज की बुनियाद प्रभावित हुई.

जाँच आयोग का कहना है कि यदि ग़ाज़ा और पश्चिमी तट में बन्दूकें व बमबारी शान्त भी हो जाती है, तो बच्चे रातोंरात इस स्थिति से नहीं उबर सकते हैं. उनके स्वास्थ्य, शिक्षा व विकास पर हुए असर को पलटा नहीं जा सकता है. 

स्वतंत्र अन्तरराष्ट्रीय जाँच आयोग ने इसराइल से इन मानवाधिकार उल्लंघन मामलों, फ़लस्तीनी बच्चों के विरुद्ध अपराधों को अंजाम दिए जाने पर विराम लगाने का आग्रह किया है. और साथ ही, अन्तरराष्ट्रीय न्यायालय की सलाहकार राय के अनुसार, क़ाबिज़ पश्चिमी तट में इसराइल की उपस्थिति के अन्त की अपील की है.

आयोग ने उन इसराइली सैन्य इकाइयों की शिनाख़्त करने की भी बात कही है, जिन्हें फ़लस्तीनी बच्चों के हताहत होने के लिए ज़िम्मेदार माना गया है. इस विषय में, इसराइल और सभी सदस्य देशों से ऐसे अपराधों के लिए जवाबदेही तय करने की मांग की गई है.

Source : UN News

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