माँ की ममता भी निभाई, सपनों की उड़ान भी नहीं रोकी! ईरान की फातमेह रज़ापुर अपने नवजात बच्चे को साथ लेकर कठिन मानी जाने वाली ‘कोंकूर’ परीक्षा देने पहुंचीं। उनकी यह तस्वीर मां की ममता, हिम्मत और अपने सपनों को पूरा करने के जज्बे की खूबसूरत मिसाल है। उन्होंने दिखा दिया कि जिम्मेदारियां कितनी भी बड़ी क्यों न हों, मजबूत इरादे इंसान को आगे बढ़ने की हिम्मत देते हैं। सलाम है ऐसे हौसले को, जो मां बनने के बाद भी सपनों को जिंदा रखता है।
ईरान की फातमेह रज़ापुर ने अपने नवजात बच्चे को साथ लेकर देश की कठिन मानी जाने वाली ‘कोंकूर’ परीक्षा दी। मां की ममता और अपने सपनों को पूरा करने के उनके इस जज्बे ने हर किसी का दिल जीत लिया। उन्होंने दिखा दिया कि अगर इरादा मजबूत हो, तो जिम्मेदारियां और मुश्किल हालात भी आपके सपनों की राह नहीं रोक सकते।

ईरान की फातमेह रज़ापुर ने अपने नवजात बच्चे को साथ लेकर देश की कठिन मानी जाने वाली ‘कोंकूर’ परीक्षा दी। मां की ममता और अपने सपनों को पूरा करने के उनके इस जज्बे ने हर किसी का दिल जीत लिया। उन्होंने दिखा दिया कि अगर इरादा मजबूत हो, तो जिम्मेदारियां और मुश्किल हालात भी आपके सपनों की राह नहीं रोक सकते।
हौसले के आगे मुश्किलें भी छोटी पड़ जाती हैं।
ईरान से सामने आई यह तस्वीर एक मां की ममता, जिम्मेदारी और शिक्षा के प्रति उसके जुनून की खूबसूरत मिसाल पेश करती है।
नवजात बच्चे को साथ लेकर परीक्षा देने पहुंची इस मां ने दिखा दिया कि मां बनने के बाद सपनों को खत्म नहीं किया जाता, बल्कि हिम्मत के साथ उन्हें पूरा किया जाता है। एक तरफ बच्चे की जिम्मेदारी, दूसरी तरफ अपनी पढ़ाई और भविष्य की चिंता—फिर भी उसने हार नहीं मानी।
