मुस्लिम राजनीति: सशक्तिकरण की लहर या सियासी सौदेबाज़ी का नया मुखौटा?

शाहिद सईद (वरिष्ठ पत्रकार, सामाजिक कार्यकर्ता) भारत के लोकतांत्रिक ढांचे में जब भी किसी वर्ग, समुदाय या समूह की बात होती है, तो अक्सर दो…

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एक कक्षा बनी न्यारी मेरे गांव में…. 

एक कक्षा बनी न्यारी मेरे गांव में…. 

बचपन में एक गाना सुना  करता था – “ एक बंगला  बने न्यारा…” शायद के एल सहगल की कालजयी आवाज़ में था. आज़ जीवन के अंतिम चरण…

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