पश्चिम बंगाल के मालदा ज़िले के 19 वर्षीय एस.के. आमिर को, भारतीय नागरिकता साबित करने वाले आधार कार्ड और जन्म प्रमाण पत्र होने के बावजूद, राजस्थान पुलिस ने 22 जुलाई को विदेशी घोषित कर बांग्लादेश भेज दिया।
तृणमूल कांग्रेस सांसद व राज्य अध्यक्ष समीरुल इस्लाम ने आरोप लगाया कि आमिर न तो रोहिंग्या है और न ही बांग्लादेशी, बल्कि बंगाली भाषी भारतीय है जिसे अवैध रूप से निर्वासित किया गया। आमिर के परिवार के अनुसार, निर्वासन से पहले वह करीब दो महीने राजस्थान के एक हिरासत केंद्र में रहा, जहां राष्ट्रीयता के दस्तावेज़ दिखाने के बावजूद पुलिस ने कोई सुनवाई नहीं की।
सोशल मीडिया पर आमिर का एक वीडियो वायरल होने के बाद, उसके पिता जियाम शेख को फोन पर पता चला कि बेटा बांग्लादेश के एक गांव में है। उन्होंने कलकत्ता उच्च न्यायालय में याचिका दायर कर बेटे की वापसी की गुहार लगाई है।
मानवाधिकार समूहों ने इस घटना को “गंभीर मानवाधिकार उल्लंघन” बताया है और दावा किया कि कई बंगाली भाषी मुसलमानों को इसी तरह गलत तरीके से हिरासत में लेकर निर्वासित किया जा रहा है।
