आबदी बानो बेग़म, जिन्हें बी अम्मा कहा जाता है, का जन्म 1852 में उत्तर प्रदेश के अमरोहा (मुरादाबाद) में हुआ। उस वक़्त औरतों के लिए…
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ग़रीबों के मसीहा और आज़ादी के सिपाही – डॉ. मुख़्तार अंसारी
हिंदुस्तान की तहरीक-ए-आज़ादी में डॉ. मुख़्तार अंसारी का नाम सुनहरे हरफ़ों में लिखा जाता है। एक कामयाब सर्जन होने के बावजूद उन्होंने अपनी ज़िन्दगी का…
View More ग़रीबों के मसीहा और आज़ादी के सिपाही – डॉ. मुख़्तार अंसारी23 साल की उम्र में केरल की सबसे कम उम्र की मुस्लिम महिला IAS बनीं सफ़ना नज़रुद्दीन
सफ़ना नज़रुद्दीन इस बात की मिसाल हैं कि अगर इंसान पूरी लगन से सपने देखे और उनके लिए मेहनत करे, तो कोई मंज़िल मुश्किल नहीं…
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बिहार के पटना ज़िले की रहने वाली मुनीरा बेग़म ने हिन्दुस्तान की आज़ादी की जंग में अहम किरदार अदा किया। वो हज़रत मख़दूम साहब के…
View More आज़ादी की जंग की सिपाही – मुनीरा बेग़म1857 की बग़ावत के बहादुर सिपाही – नवाब वलीदाद ख़ान
1857 की आज़ादी की जंग में नवाब वलीदाद ख़ान का किरदार बहुत अहम रहा। 26 जून 1857 को उन्होंने बादशाह बहादुरशाह ज़फ़र को ग़ाज़ियाबाद से…
View More 1857 की बग़ावत के बहादुर सिपाही – नवाब वलीदाद ख़ानकश्मीर की बेटी का कमाल – कौसर जबीन बनीं सहायक प्रोफेसर
कश्मीर की वादियों से एक ख़ुशखबरी सामने आई है। कुनैल क़ाज़ियाबाद की रहने वाली सैयद कौसर जबीन को कश्मीर यूनिवर्सिटी के अंग्रेज़ी विभाग में सहायक…
View More कश्मीर की बेटी का कमाल – कौसर जबीन बनीं सहायक प्रोफेसर“जम्मू से कश्मीर घाटी तक: 1947 का सच और अधूरी कहानी”
सईद नकवी (सुविख्यात पत्रकार सईद नकवी की पुस्तक Being the others ; muslim in India का हिंदी अनुवाद “वतन में पराया : हिंदुस्तान में मुसलमान”…
View More “जम्मू से कश्मीर घाटी तक: 1947 का सच और अधूरी कहानी”“15 अगस्त: जब गांधी के शब्द बदल गए और भारत बंट गया”
सईद नकवी विभाजन के विचार पर जवाहरलाल नेहरू शुरुआती एतराज और विरोध के बाद अंत तक कायल हो गए कि विभाजन के अलावा अन्य विकल्प…
View More “15 अगस्त: जब गांधी के शब्द बदल गए और भारत बंट गया”गूजर ख़ानदान की बहादुर हबीबा, 1857 की जंग-ए-आज़ादी में बनी हिम्मत और कुर्बानी की मिसाल
हबीबा का जन्म 1833 में उत्तर प्रदेश के एक गांव में गूजर ख़ानदान में हुआ था। बचपन से ही उनमें हिम्मत और आत्म-एतबार नज़र आता…
View More गूजर ख़ानदान की बहादुर हबीबा, 1857 की जंग-ए-आज़ादी में बनी हिम्मत और कुर्बानी की मिसालवज़ीर अली ख़ान ऐसे सिपाही जिन्होंने 1857 से 58 साल पहले ही अंग्रेज़ों के ख़िलाफ़ बग़ावत की जंग छेड़ी
वज़ीर अली ख़ान को हिन्दुस्तान में अंग्रेज़ों के ख़िलाफ़ शुरुआती बग़ावत का बहादुर सिपाही माना जाता है। सन 1799 में, 1857 से 58 साल पहले,…
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