मुराद जेल में था, शाहजहां क़ैद में था और दारा भगोड़ा साबित हो चुका था ऐसे में औरंगजेब ने 31 जुलाई 1658 के दिन दिल्ली…
View More “दिल्ली से दक्कन तक: औरंगजेब की फतेह और आर्थिक महाशक्ति की दास्तानश्रेणी: opinion
“एक खत, एक जंग और उस्मानी सल्तनत की हुई शिकस्त”
आज के दिन ही, 20 जुलाई 1402 ई. को 15वीं सदी की दुनिया दो बड़ी ताकतें अंकारा के मैदान में एक दूसरे के आमने-सामने आ…
View More “एक खत, एक जंग और उस्मानी सल्तनत की हुई शिकस्त”“जब फकीर ने दुआ दी और अलाउद्दीन बन गया दिल्ली का सुल्तान”
आज के दिन ही, 19 जुलाई 1296 ई. को, सुल्तान जलालुद्दीन खिलजी के क़त्ल के बाद दिल्ली का ताज सुल्तान अलाउद्दीन खिलजी को मिला था।…
View More “जब फकीर ने दुआ दी और अलाउद्दीन बन गया दिल्ली का सुल्तान”“फिराक गोरखपुरी: शायरी का बागी और मोहब्बत का फकीर”
रह-रह कर सिगरेट के कश भरना, चुटकी बजाकर राख को झाडऩा, बीच-बीच में बड़ी-बड़ी चमकती आंखें फैलाकर अपने तर्क की मजबूती से सामने वाले को…
View More “फिराक गोरखपुरी: शायरी का बागी और मोहब्बत का फकीर”इमाम हुसैन के लिए जान की बाज़ी लगाने वाले हुसैनी ब्राह्मणों की कहानी
– अशोक कुमार पांडे कर्बला में एक जगह है – अज-दयार-उल-हिंदिया यानी हिंदुओं के रहने की जगह। चौदह सौ साल पहले की बात है कि…
View More इमाम हुसैन के लिए जान की बाज़ी लगाने वाले हुसैनी ब्राह्मणों की कहानी“थरूर की बौद्धिक राजनीति और राहुल का सामाजिक प्रतिरोध”
– प्रशांत टंडन कांग्रेस को शशि थरूर से पूछना चाहिए कि पार्टनर तुम्हारी पॉलिटिक्स क्या है? कुछ साल पहले की बात है एक इंटरव्यू बोर्ड…
View More “थरूर की बौद्धिक राजनीति और राहुल का सामाजिक प्रतिरोध”मुस्लिम राजनीति: सशक्तिकरण की लहर या सियासी सौदेबाज़ी का नया मुखौटा?
शाहिद सईद (वरिष्ठ पत्रकार, सामाजिक कार्यकर्ता) भारत के लोकतांत्रिक ढांचे में जब भी किसी वर्ग, समुदाय या समूह की बात होती है, तो अक्सर दो…
View More मुस्लिम राजनीति: सशक्तिकरण की लहर या सियासी सौदेबाज़ी का नया मुखौटा?मियां मीर लाहौरी ने रखी थी स्वर्ण मंदिर की बुनियाद
शाह फहद नसीम स्वर्ण मंदिर जिस का पुराना नाम हरमंदिर साहब है. इस का संग ए बुनियाद जहांगीर के ज़माने के मशहूर सूफ़ी बुज़ुर्ग हज़रत…
View More मियां मीर लाहौरी ने रखी थी स्वर्ण मंदिर की बुनियादमोदी के ग्यारह वर्षों के कार्यकाल में भारत की सामाजिक गिरावट को सुधारा नहीं जा सकता
आनंद तेलतुम्बडे यद्यपि मोदी सरकार की आर्थिक विफलताओं और कूटनीतिक गलतियों के बारे में बहुत कुछ लिखा जा चुका है, लेकिन सबसे अधिक घातक क्षति…
View More मोदी के ग्यारह वर्षों के कार्यकाल में भारत की सामाजिक गिरावट को सुधारा नहीं जा सकताराहुल गांधी: एक मुखर आलोचक के तौर पर सत्ता के सामने निरंतर चुनौती
(शुचि विश्वास) भारतीय राजनीति बेहद नाज़ुक दौर से गुज़र रही है. यहां नफ़रत और झूठ का फलता-फूलता कारोबार सत्ता में बने रहने की गारंटी बन…
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